स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर दस्तावेज़

पाठ्यक्रम: GS2/शासन/स्वास्थ्य

संदर्भ

  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इंडिया मेडिकल डिवाइस 2026 में ‘मेडटेक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता: कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा में क्रांतिकारी परिवर्तन’ शीर्षक से ज्ञान पत्र जारी किया।

प्रमुख बिंदु

  • रिपोर्ट में स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उत्तरदायी उपयोग को गति देने के लिए पाँच प्रमुख प्राथमिकताओं को रेखांकित किया गया है।
    • इनमें AI-अनुकूल डेटा और साक्ष्य, जीवन-चक्र आधारित विनियमन एवं प्रतिपूर्ति तंत्र, AI-सक्षम निदान के विस्तार तथा सरकार, उद्योग, स्वास्थ्य सेवा और अकादमिक जगत के बीच सहयोग को सुदृढ़ करना शामिल है।
  • रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि भारत के पास अपनी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, सॉफ्टवेयर क्षमताओं, नैदानिक विविधता और बढ़ते मेडटेक विनिर्माण आधार का लाभ उठाकर उत्तरदायी AI-सक्षम चिकित्सा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनने का अवसर है।

स्वास्थ्य सेवा में AI का उपयोग

  • AI-आधारित उपकरण रोगों का निदान और पूर्वानुमान कर सकते हैं, नैदानिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित कर सकते हैं, अस्पताल प्रबंधन में सुधार कर सकते हैं, दवा खोज में सहायता कर सकते हैं तथा स्वास्थ्य सेवा संबंधी अनुसंधान में सहयोग प्रदान कर सकते हैं।

स्वास्थ्य में AI के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की चार प्राथमिकताएँ

  • अनुसंधान संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण डेटा का संकलन करना।
  • निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी को बढ़ावा देना।
  • ICMR के संस्थानों के नेटवर्क के माध्यम से वास्तविक-विश्व साक्ष्य तैयार करना।
  • स्वास्थ्य एवं चिकित्सा पेशेवरों को AI कार्यबल की प्रक्रिया में तत्काल एकीकृत करना।

स्वास्थ्य सेवा में AI के उपयोग का महत्व

  • बेहतर नैदानिक सटीकता: AI बड़ी मात्रा में चिकित्सा डेटा और इमेजिंग स्कैन का तीव्रता से विश्लेषण कर सकता है, जिससे चिकित्सकों को रोगों का पहले और अधिक सटीक चरण में पता लगाने में सहायता मिलती है।
  • बेहतर दक्षता और समय की बचत: AI नियमित कार्यों को स्वचालित करता है, जिससे स्वास्थ्य सेवा पेशेवर मरीजों की देखभाल पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
  • व्यक्तिगत उपचार: AI आनुवंशिक जानकारी, जीवनशैली संबंधी डेटा और चिकित्सा इतिहास का विश्लेषण करके प्रत्येक मरीज के लिए अनुकूलित उपचार योजनाएँ तैयार करने में सहायता कर सकता है।
  • रोगों की शीघ्र भविष्यवाणी और रोकथाम: AI मॉडल स्वास्थ्य संबंधी डेटा में पैटर्न की पहचान कर संभावित रोगों का पूर्वानुमान लगा सकते हैं, जिससे निवारक स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा मिलता है।
  • दवा खोज और अनुसंधान में सुधार: AI जटिल जैविक डेटा का विश्लेषण करके दवा खोज और नैदानिक परीक्षणों की प्रक्रिया को तीव्र करता है, जिससे नई दवाओं के विकास में लगने वाला समय और लागत कम हो सकती है।
  • स्वास्थ्य सेवा की बेहतर पहुँच: AI-संचालित टेलीमेडिसिन और वर्चुअल स्वास्थ्य सहायक दूरस्थ एवं स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने में सहायता कर सकते हैं, जिससे चिकित्सा सुविधाओं तक पहुँच में सुधार होता है।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन में सहायता: AI सरकारों और स्वास्थ्य संगठनों को रोग निगरानी, प्रकोप के पूर्वानुमान तथा नीति-निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर डेटा का विश्लेषण करने में सहायता करता है।

चिंताएँ

  • AI प्रॉम्प्ट के माध्यम से डेटा लीक होने का जोखिम: स्वास्थ्य सेवा कर्मी जनरेटिव AI उपकरणों का उपयोग करते समय अनजाने में मरीजों का विवरण प्रॉम्प्ट या अपलोड किए गए दस्तावेजों में शामिल कर सकते हैं, जिससे बाहरी सर्वरों पर संवेदनशील जानकारी के उजागर होने का जोखिम रहता है।
  • स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में बढ़ते साइबर सुरक्षा खतरे: स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र पहले से ही साइबर अपराधियों का प्रमुख लक्ष्य है। डिजिटलाइजेशन और AI के बढ़ते एकीकरण से साइबर हमलों के लिए उपलब्ध संभावित क्षेत्र अधिक विस्तृत हो जाता है।
  • जागरूकता और प्रशिक्षण का अभाव: स्वास्थ्य सेवा कर्मियों को पर्याप्त साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण प्राप्त न होने के कारण अनजाने में डेटा के उजागर होने की संभावना बढ़ सकती है।
  • नियामक और नैतिक चिंताएँ: मरीजों के डेटा का उल्लंघन डेटा संरक्षण कानूनों और चिकित्सा गोपनीयता से संबंधित नैतिक दायित्वों का उल्लंघन कर सकता है। इससे स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों के प्रति लोगों का विश्वास कमजोर हो सकता है।

भारत की AI-स्वास्थ्य संबंधी नीतियाँ

  • स्वास्थ्य सेवा के लिए भारत की AI रणनीति (SAHI): SAHI एक अनुशंसात्मक राष्ट्रीय ढाँचे के रूप में कार्य करता है, जो यह निर्धारित करने के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करता है कि AI को स्वास्थ्य सेवाओं में किस प्रकार एकीकृत किया जा सकता है।
    • राष्ट्रीय ढाँचे के रूप में शुरू किया गया SAHI पूरे भारत में स्वास्थ्य सेवा वितरण में AI के एकीकरण के लिए एक संरचित रोडमैप प्रस्तुत करता है।
  • BODH (स्वास्थ्य संबंधी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए मुक्त डेटा मंच का मानकीकरण): इसे AI शिखर सम्मेलन के दौरान शुरू किया गया। यह बड़े पैमाने पर लागू किए जाने से पहले Health AI समाधानों के परीक्षण और सत्यापन के लिए एक संरचित तंत्र प्रदान करता है।
    • इसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सहयोग से विकसित किया गया है।

स्रोत: AIR

 

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